बैसाखी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है

बैसाखी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है | Why Baisakhi is Celebrated

क्या है बैसाखी, क्यों और कब मनाई जाती है

हेलो दोस्तों आज हम Baisakhi 2022 के त्यौहार के बारे में जानेगे। बैसाखी का त्यौहार हर वर्ष वैशाख के महीने में मनाया जाता है। वैसे हमारा देश त्योहारों का देश है, जहां हर पर्व पुरे धूम धाम से मनाया जाता है, बैसाखी को वैसाख, महीने में यानि अप्रैल में मनाते है. ये नई फसल का त्यौहार है और नए वसंत के प्रतीक के रूप में अत्यंत उत्साह एवं धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

बैसाखी का महत्व

बैसाखी का पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक के साथ आर्थिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। पंजाबी समुदाय की स्थापना दिवस होने के कारण जहां यह सिक्खों के लिए पवित्र दिन है, वहीं हिंदूओं के लिए भी कई मायनों से खास है। बैसाख माह में भगवान बद्रीनाथ की यात्रा की शुरुआत होती है। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान बद्रीनाथ बैसाख के महीने में अपनी यात्रा शुरू करते हैं। बैसाखी का दिन सूर्य के मेष राशि यानि मेष संक्रांति में परिवर्तन के कारण भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी दिन से सौर नववर्ष की शुरुआत भी होती है।

बैसाखी का पर्व उन तीन त्योहारों में से एक है जिसे सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास द्वारा मनाया गया था। बैसाखी को अंतिम सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के राज्याभिषेक के साथ-साथ सिख धर्म के खालसा पंथ की नींव के तौर पर मनाया जाता है, इसलिए इसे सिख धर्म के लिए विशेष माना गया है।

इस दिन को फसल के मौसम के अंत का प्रतीक भी माना जाता है जो किसानों के लिए विशेष रूप से समृद्धि का समय है। वैसाखी के नाम से भी प्रसिद्ध है और यह खुशी और उत्सव का पर्व है। यह त्यौहार मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण होता है। सिख आबादी के द्वारा बैसाखी बहुत उत्साह से मनाई जाती है। इस समय तक फसल पक क्र त्यार हो जाती है और लोग इसको काट कर, गेहू निकल कर घरो में ले जाते है.

इस त्यौहार से संबंधित कई त्यौहार हैं जो भारत में मनाए जाते हैं जैसे पश्चिम बंगाल में पोहेला बोइशाख, तमिलनाडु में पुथंडु, असम में बोहाग बिहू, पूरमुद्दीन केरल, उत्तराखंड में बिहू, ओडिशा में महा विष्णु संक्रांति, और आंध्र प्रदेश में उगादी और कर्नाटक

बैसाखी किसानों का त्यौहार

सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होने के कारण धूप बढ़ने लगती है, ये गर्मी का आरंभ होता है। जो गेहू की फसल को पकने में मदद करती है इसलिए किसान इसे उत्सव की तरह मनाया जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह समाप्त हो चुकी होती है और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। इस त्यौहार को मौसम में होने वाले कुदरती बदलाव के कारण भी मनाया जाता है.

बैसाखी की पौराणिक मान्यता

औरंगजेब से लड़ते हुए सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर शहीद हो गए थे। उस समय, तेग बहादुर मुगलों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों के खिलाफ लड़ रहे थे। इस युद्ध में उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुरु गोबिंद सिंह अगले गुरु बने। वर्ष 1650 में पंजाब मुगलों, अत्याचारियों और भ्रष्टाचारियों के अत्याचारों का सामना कर रहा था। उस समय समाज में लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा था और लोगों को न्याय की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी।

ऐसी विपत्ति में गुरु गोबिंद सिंह ने अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने और सभी लोगों में साहस पैदा करने का काम किया। उन्होंने लोगों से आनंदपुर में सिखों का एक संगठन बनाने का आह्वान किया। इसी सभा में उन्होंने अपनी तलवार उठाई और लोगों से पूछा कि तुम में से वे वीर योद्धा कौन हैं जो बुराई के खिलाफ शहीद होने को तैयार हैं। उस समय सभा में से पांच योद्धा निकले और इन पांच योद्धाओं को “पंच प्यारे” कहा गया जिसे खालसा पंथ का नाम दिया गया।

2022 में बैसाखी कब है

पंचांग के अनुसार, बैसाखी वाले दिन विशाखा नक्षत्र होता है। पूर्णिमा को विशाखा नक्षत्र होने के कारण ही इस माह को बैसाखी कहते हैं। वैशाख महीने के पहला दिन ही बैसाखी होता है। बैसाखी से पंजाबी नववर्ष का आरंभ होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, बैसाखी इस साल 14 अप्रैल के दिन मनाया जायेगा।

बैसाखी कैसे मनाये

बैसाखी को मुख्य रूप से किसी गुरुद्वारे में जाकर गुरु का आशिर्बाद ले कर, भांगड़ा और गिद्दा नृत्यु मना सकते है. इसके आलावा आप गरीबो की मदद कर सकते है. ऐसे लोग जिनको खाना नहीं मिलता उनको खाने की व्यबस्ता, जिनको रहने के के लिए छत नहीं है उनको घर आदि का इंतजाम करके कर सकते है.

KR Digital Makers की पूरी टीम की तरफ से आपको बैशाखी की बहुत बहुत बधइया. धन्यबाद!

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