Web 3.0 क्या है ? कैसी होगी Virtual दुनिया | जानिए कैसे बदलेगा इंटरनेट

Web 3.0 क्या है ? कैसी होगी Virtual दुनिया | जानिए कैसे बदलेगा इंटरनेट

Web 3.0 अभी तक का सबसे एडवांस्ड इंटरनेट होगा, जिससे आप कोई काम कर भी सकेंगे और उसमें हिस्सेदार भी बन सकेंगे.

हेलो, दोस्तों में कमल स्वागत करता हूँ आपका Krdigitalmakers.com पर और हम कुछ नया टॉपिक लेकर आये है. इस ब्लॉग पोस्ट में हम web 3.0 के बारे में जानेगे आखिर क्या है ये. और क्या बदल जाएगी इसके आने से Internet की दुनिया. Web 3.0 समझने के लिए आपको इंटरनेट और tech की दुनिया को सुरु से समझना पड़ेगा।

आज के समय में हमारा ज्यादातर काम Internet के जरिए होता है। इंटरनेट अब केवल एक साधारण इंटरनेट नहीं रह गया है, यह काफी हाईटेक हो चूका है। लेकिन, आने बाले कुछ समय मे आप इंटरनेट का एक ऐसे रूप का अनुभव करेंगे जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘वेब 3.0’ की।

बहुत कम लोग है जिन्होंने Web 3.0 के बारे में सुना होगा। लेकिन, सच तो यह है कि इंटरनेट की इस दुनिया में इस समय वेब 3.0 ने तहलका मचा कर रखी है और सुर्खियो में है. इसके लिए आपको इंटरनेट की शुरुआत से जनंना पड़ेगा जिसे Web 1.0 और इसके बाद अभी जो चल रहा है Web 2.0 के बारे जानना होगा।


Web 1.0 क्या है?

वेब 1.0 का उपयोग 1995-2004 किया गया. उस समय मौजूद वेबसाइट पर ब्राउजर द्वारा रिक्वेस्ट की जाती थी और वेबसाइट रिस्पांस (सूचना) देती थी। इन वेब्सीटेस को Static Website कहा जाता था.

वेब 1.0 में, केवल वेबसाइट पर दी गई सामग्री को पढ़ा जा सकता था और ये एक One Way Communication था. उस पर संलग्न नहीं हो सकता था जैसे – फाइल अपलोड करना, [ Comment ] टिप्पणी आदि नहीं कर सकते थे।


Web 2.0 क्या है?

वेब 2.0 की शुरुआत Web 1.0 ख़त्म होते ही हो गई थी. 2004 से Web 2.0 उपयोग किया जा रहा है, आज भी हम web 2.0 का उपयोग कर रहे है. इसमें Dynamic website आई. । वेब 2.0 में, वेबसाइट पर यूजर सामग्री को पढ़ने के अलावा, आप फ़ाइलों और सामग्री को अपलोड और डाउनलोड, टिप्पणी [ Comment ], वीडियो देखने और उस पर खरीदारी, Chatting, Dating जैसे काम कर सकते हैं। इसने online shopping, ecommerce, social जैसी साइट्स को जनम दिया।

इसमें कोई भी व्यक्ति अपनी वेबसाइट बनाकर कंटेंट बना सकता है। और उसके जरिये अपनी कमाए कर सकता है, ये क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म पर बेस्ड है.

बड़ी – 2 कम्पनिया जैसे Amazon, Google, Microsoft जैसी कंपनियों के साथ बहुत सरे कस्टमर जुड़े हुए है और धीरे – २ इन सब कंपनियों अपने कस्टमर का डाटा कॉटेक्ट कर लिया है और वो सभी यूजर का बेहवीयर को जानते है, जिसके आधार पर वो उनको टारगेट करते है.

इसका मतलब है कि Google, Amazon, Facebook, WhatsApp और Microsoft आदि आपके डेटा का उपयोग अपनी इच्छा के अनुसार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी को अपना डेटा बेचना।

यही कारण है की आप जब आप अपने फ़ोन में खाने का आर्डर करते है या ऑनलाइन शॉपिंग करते है. तो कम्पनीज आपके बाहवियर को जान लेती है और यही कारण है आपको कंपनी के विज्ञापन देखने को मिलते हैं, जिससे पता चलता है कि आपका डेटा 100% एन्क्रिप्टेड नहीं है।

लेकिन आपका डेटा इन कंपनियों द्वारा किसी गलत कंपनी को नहीं दिया जाता है, यह आपकी बुनियादी जानकारी साझा करता है ताकि आप अपने उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ाने के लिए नुकसान न करें।


Web 3.0 क्या है?

वेब 3.0 इंटरनेट का तीसरा बरजन होगा जो आने बाले कुछ सालो में अपनी एक नए दुनिया बना लेगा। Tim Berners-Lee ने Web 3.0 को semantic Web कहा था जोकि WWW यानि World Wide Web के inventor है।

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Web 3.0 एक decentralized data system है जो blockchain तकनीक पर काम करती है, जहां हमारा डेटा एक सर्वर पर संग्रहीत नहीं होता है, बल्कि दुनिया भर के नोड्स में विभाजित होता है जो हमारे डेटा को ब्लॉकचेन पर संग्रहीत करता है। जिसे हैक करना लगभग नामुमकिन है और वही सेंट्रलाइज्ड सर्वर को आसानी से हैक किया जा सकता है.

Decentralized System का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह किसी भी कंपनी द्वारा नियंत्रित नहीं होता है, अगर किसी भी कंपनी के पास और block chain में जो डाटा होगा वो Incept Data फॉर्म में होगा, इसमें हमारा अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण होता है, अगर Meta [ Facebook ], Google, Amazon जैसी कंपनियां हमारे डेटा का उपयोग करना चाहती हैं, तो उन्हें पहले हमसे अनुमति लेनी होगी। अब लगभग हमारे पास 80% कण्ट्रोल हमारे पास होगा जबकि पहले ये हमारे पास 20% भी नहीं था. और कम्पनीज इस डाटा को बेच कर अपना फायदा कमाती थी. web 3.0 समझने के लिए आपको ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी को समझना पड़ेगा।


Blockchain Technology क्या है?

Blockchain दो शब्दो के मिलने से बना है, Block + Chain, जब बहुत सारे blocks और पैकेट मिलकर एक चैन बनाते हैं जिसमे डाटा स्टोर होता है. ब्लॉकचेन के इस नेटवर्क में हर यूजर्स के कंप्यूटर में blocks के रूप मे उपस्थित होता है। क्योंकि इसमें P2P (Person 2 Person) कनेक्शन होता है जैसे: block A – block B – block C…+… और यह सारे blocks एक दूसरे के साथ एक चैन और नेटवर्क के माद्यम से जुड़े होंगे। ऐसी को ब्लॉकचैन और decentralized network कहा गया.

अगर कोई हैकर किसी एक ब्लॉक को हैक कर भी लेता है तो ज्यादा घ्राणी ही जरूरत नहीं है क्युकी हर एक ब्लॉक की अलग से सिक्योरिटी होगी जिसको तोडना बूत ही मुश्किल होगा।


Web 3.0 के फायदे क्या है?

Ownership

सबसे बड़ा फायदा web 3.0 का ये होगा की इसमें जो ही इनफार्मेशन, क्नॉलेज और कोई फोटो, वीडियो आप अपलोड करेंगे उसके मालिक आप बन जायेंगे।

उदाहरण के लिए: अभी YouTube पर हम कोई वीडियो अपलोड करते है तो उसका मालिक यूट्यूब बन जाता है न की आप. YouTube की मर्जी है आपकी वीडियो अखनि है या डिलीट करनी है. Decentralization में आपकी मर्जी होगी आप रख भी सकते है और हटा भी सकते है.

Information

ज्यादा से ज्यादा डाटा और इनफार्मेशन को एक्सेस में ये मददगार साबित होगा।

Elimination

ये ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी पर बेस्ड होगा तो एक्सेस भी सेंट्रलाइज्ड नहीं होगा। जिसमे कोई भी आपके अकाउंट और आपके डाटा को डिलीट नहीं कर पायेगा।

Permission

Web 3.0 में आप अपनी आइडेंटिटी को एन्क्रिप्ट कर सकते है और कोई भी आपको पहचान नहीं पायेगा। उनके लिए आप सिर्फ एक एंटिटी हो, उनको कोई इनफार्मेशन नहीं होगी आप कोन हो, खान से हो etc.

इसमें आप मिंटो में लाखो transition कर सकते हो करेंसी भी वर्चुअल होगी, और Transition की कोई लिमिट भी बन्हि होगी।

Virtual World

इसमें आप एक विरचालदुनिया में चले जायेंगे थ्रो सोशल मीडिया। जैसे की पहले हम पहले फेसबुक पर chat आदि कर पते थे, लेकिन Metaverse में आप एक काल्पनिक दुनिया में चलेजाएंगे। उसमे आप ऑनलाइन Dating, study, buy & sale सब कुछ कर पाएंगे। इसमें तूच एंड फील भी होगा। ये सब होगा मेटा बर्श से.

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Web 3.0 के Advantages & Disadvantages क्या है?

Advantages:

सिमेंटिक वेब ऑनलाइन सूचना नेटवर्क में मदद करेगा।
इंटरनेट पर विचार करना आसान होगा।
लोग बहुत आगे बढ़ेंगे।
आपको पूर्ण और सही खोज परिणाम मिलेंगे।
इंटरनेट पर काम करना आसान होगा।
ज्ञान या जानकारी देना आसान होगा।

Disadvantages:

वेब 3.0 पुराने उपकरणों के साथ संगत नहीं होगा।
लोगों को वेब 3.0 को समझने में समय लगेगा।
तकनीक अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
लोगो का सार्वजनिक/निजी विवरण लेना आसान होगा।
लोग इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताएंगे।

 

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