Radha Krishna Love Quotes

राधा ने श्री कृष्ण से पूछा
प्यार का असली मतलब क्या होता है..?
श्री कृष्णा ने हंस कर कहा
जहा मतलब होता है वहां प्यार ही कहा होता है..!

हे कान्हा
जी भर के तुम्हे देखूं,
कुछ ऐसा नज़ारा हो,
बेताबी मेरी नज़र में हो,
और चेहरा तुम्हारा हो !

हे कान्हा!
यूँ ही नहीं दिल ढूँटता बार बार,
एक हिस्सा है मेरा जो बसता है तुझमें…!

आज फिर याद आ गए कान्हा मुझे ..
तुमसे मिलने के कुछ प्यारे लम्हे
फिर से तेरा चेहरा सामने नजर आया
झील के नीले-नीले पानी में…!

हे कान्हा
मुकम्मल हो जाती हूँ तेरे करीब आते ही,
अधूरी सी रहती हूँ,
जो में खो जाऊं तेरे ख्यालों में कहीं.?

हे कान्हा!
कैसे बताऊँ तुम्हे, अपने इश्क का अंदाज…
मैंने हद में रहकर, तुमसे बेहद मोहब्बत की है..!

दिन में भी तुम याद आते हो,
रात में भी तुम याद आते हो,
कभी-२ इतना याद आते हो की,
आइना हम देखते हैं और आप ही आप नज़र आते हो…!

हे कान्हा !
रूबरू होने का मौका रोज कहाँ मिलता है…
इसलिए मैं तुम्हे शब्दों से छू लेती हूँ…!

हे कान्हा !
घड़ी की सुईओं जैसा रिश्ता तेरा मेरा,
कभी मिले.. न मिले,
पर साथ हमेशा जुड़े रहे..!

कृष्ण ने राधा से पूछा
कि एक जगह बताओ यहाँ में नहीं हूँ.
राधा ने मुस्कुराते हुए कहा
की मेरे नसीब में…!

सांवरे…
एक छोटी सी ख्वाहिश है,
तुम्हे मेरी याद नहीं आती तो न आये..
बस मुझे तुम्हारी याद आती है
यह तुम्हे पता चल जाए…!

मोहब्बत पाकीज़ा इबादत होती है
तभी तो कृष्ण के साथ मंदिरों में
रुक्मणी नहीं..
राधा होती है..!

हे कान्हा!
साँसों की तरह शामिल हो तुम मुझमें…
मुझमें समाय हो
मगर ठहरते नहीं..!

तुझे हमने दिल से चाहा है,
बस तेरे दीदार की तमन्ना की है
हर सांस पर तेरा ही नाम आया है,
हरपल सिर्फ तुझे पाने की दुआ की है…

हे कान्हा !
काश ऐसा हो कि किसी दिन हम दुआ में तुम्हे मांगे…
और तुम गले लगा के कहो..
और कुछ..?

मेरे श्याम !
कर सितम कितने भी मुझ पर
इस दिल की हर धड़कन तेरे
नाम की होगी
ख्वाहिश तो अधूरी है बहुत सी…
मगर आखरी ख्वाहिश तेरे दीदार की होगी…

सांवरे !
लाखों ख्वाब पाले हैं…
जेहन में तुमको लेकर..
पर हक़ीक़त यहीं है…
वह सब ख्वाब ही हैं…

ऐ दिल चल सोधा कर लेते हैं..
जिस दिन में कान्हा के लिए तड़पना छोड़ दू..
तू मेरे लिए धड़कना छोड़ देना..

हे कान्हा !
तेरी हलकी सी झलक क्या मिली
मेरी बेचैनी नज़रों को,
दिल ने हज़ारों हसीन ख्वाब
देख डाले चंद लम्हों में..

मेरे दिल की मजबूरी को कोई इलज़ाम न दे,
मुझे याद रखे बेशक मेरा नाम न ले,
तेरा बहम हैं की मैंने भुला दिया
मेरी एक भी सांस ऐसी नहीं जो तेरा नाम न ले..
जय श्री राधे श्याम

हे कान्हा!
तृम्हारी चाहत के वह दो हमले बहुत जानलेवा थे,
पहला तुमसे मुलाक़ात,
और फिर प्रेम की शुरुआत…!

दीवाने तेरे हैं, इस बात से इंकार नहीं,
कैसे कहे की हमें आपसे प्यार नहीं,
कुछ तो कसूर है आपकी निगाहों का,
हम अकेले तो गुनहगार नहीं…!

तेरे सिवा
कौन समा सकता है मेरे दिल में ,
रूह भी गिरवी रख दी है तेरी चाहत में…!

हर पल उस से मिलने की चाहत क्यों होती है,
हर पल उसकी ज़रूरत क्यों होती है,
जिसे हम पा नही सकते,
खुदा जाने उसी से मोहब्बत क्यों होती है…

हर शाम हर किसी के लिए
सुहानी नहीं होती,
हर प्यार के पीछे कोई
कहानी नहीं होती,
कुछ तो असर होता है
दो आत्मा के मेल का,
वरना गोरी राधा
सांवले कृष्णा की दीवानी ना होती…

एक बार राधा जी ने कृष्ण से पूछा
गुसा क्या है ..?
बहुत ख़ूबसूरत जबाब मिला
किसी की गलती का सजा खुद को देना !

वो जमुनातट फेरे लगाये,
गोपियों के संग रास रचाये,
जिसकी दीवानी है,
ब्रिज की हर बाला,
वो कृष्णा है।

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