नीम के ऐसे अचूक फ़ायदे रोज सेवन से मिलेंगे हर बीमारी से निज़ात

नीम के ऐसे अचूक फ़ायदे रोज सेवन से मिलेंगे हर बीमारी से निज़ात

“जितना कड़वा उतना ही फायदेमंद”

​नीम हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। ​नीम एक बहुत अच्छी वनस्पति है जो भारतीय पर्यावरण के अनुकूल और हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। नीम के वृक्ष पूरे दक्षिण एशिया में पाए जाते हैं। ​
नीम को संस्कृत में निम्ब, वनस्पति विज्ञान में ‘आज़ादिरेक्ता- इण्डिका  अथवा Melia Azadirachta कहते है।इसे चमत्कारिक वृक्ष के नाम से जाना जाता है। इसे भारत में निम्बा के नाम से जाना जाता है। नीम का संस्कृत नाम अरिष्ट है जिसका अर्थ है बीमारी से राहत। मार्गोसा वृक्ष भी इसका अन्य नाम है ।
​भारत में एक कहावत प्रचलित है “जिस देश में नीम के पेड़  होते हैं वहां पर मृत्यु और बीमारियां कैसे हो सकती हैं”। भारत में नीम के औषधीय गुणों की जानकारी हजारों वर्षों से रही है। भारत में नीम को एक औषधीय रूप तथा पूजनीय वृक्ष के रूप में जाना जाता है।
नीम भले ही कड़वा होता है पर इसकी कड़वाहट शरीर के कई दोषों रोगों को दूर करती हैं। नीम का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। नीम को सर्वोच्च औषधि के रूप में माना जाता है। यह सेवन में भले ही कड़वा होता हो लेकिन इसके लाभ अमृत के समान है।

​नीम के विभिन्न भागों का उपयोग | Uses of Different Parts of Neem

नीम के पत्ते | Neem Leaves

​नीम के पौधे की पत्तियां सबसे बहुमुखी और आसानी से उपलब्ध संसाधन हैं। उनमें बीज के समान सक्रिय तत्व होते हैं, बस बहुत कम एकाग्रता में। पत्तियां पूरे वर्ष उपलब्ध हैं, क्योंकि नीम का पौधा सदाबहार है।
​​पत्तियों से अपना खुद का नीम घरेलू उपचार करना आसान है। नीम टूथपेस्ट और माउथ वॉश में स्किन केयर प्रोडक्ट्स, हेयर ऑयल में लीफ पेस्ट और अर्क का इस्तेमाल किया जाता है और इनके बहुत सारे औषधीय उपयोग भी हैं।
कई हर्बलिस्ट पत्तियों को चबाने, सूखे पत्ते के कैप्सूल लेने या कड़वी चाय पीने की सलाह देते हैं। पत्ते रक्त को शुद्ध करते हैं, जठरांत्र प्रणाली (अल्सर!) की मदद करते हैं, यकृत का समर्थन करते हैं, और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
हालाँकि भारत में हजारों सालों से नीम के पेड़ की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन मेरा सुझाव है कि इन्हें आंतरिक रूप से लेते समय आप सावधान रहें। नीम एक बहुत ही शक्तिशाली जड़ी बूटी है। पहले एक योग्य हर्बलिस्ट से पूछना सबसे अच्छा है, और इसे लंबे समय तक आंतरिक रूप से नहीं लेना है।
हालांकि, नीम पत्ती के अर्क और पत्ती के पेस्ट का सामयिक उपयोग सुरक्षित है। त्वचा की देखभाल और त्वचा विकारों का इलाज नीम का पौधा वास्तव में चमकता है।
यह बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण या परजीवी को खत्म करने में बेहद प्रभावी है, इसकी एंटीवायरल गतिविधि मौसा और ठंड घावों का इलाज कर सकती है, यह सूजन और लालिमा कम कर देता है, यह त्वचा को मॉइस्चराइज़ करता है और इसे कोमल रखता है, यह निशान और रंजकता को भी हल्का कर सकता है।

​नीम की टहनी | Neem Sprig

युवा, कोमल शाखाओं को चबाना, और फिर उन्हें टूथब्रश के रूप में उपयोग करना, गुहाओं और मसूड़ों की बीमारी को रोकता है। भारतीय ग्रामीणों ने सदियों से इस पद्धति का उपयोग किया है।

नीम के फूल | Neem Flowers

नीम के पौधे के फूलों में एक प्यारा, मीठा, शहद जैसा गंध होता है। यह काफी गहन है, दूर से ध्यान देने योग्य है, लेकिन कभी भी अधिक ताकत वाला नहीं है। मधुमक्खियों को नीम के फूल पसंद हैं और नीम शहद लोकप्रिय है। फूल के तेल का उपयोग अरोमाथेरेपी में भी किया जाता है और इसमें शांत और पुनर्स्थापना प्रभाव होता है।

नीम की छाल | Neem Bark

स्पष्ट कारणों से नीम के पेड़ की छाल को बीज या पत्तियों के रूप में उपयोग नहीं किया जाता है। इसमें उतना नहीं है, यह जल्दी से पुन: उत्पन्न नहीं करता है, और इसका उपयोग करना थोड़ा अधिक कठिन है। इसकी सूखी और कठोर प्रकृति के कारण सामग्री को निकालना अधिक कठिन होता है।
हालांकि, एक औषधीय क्षेत्र में छाल का उपयोग करने के लिए अनुशंसित पौधा भाग होता है। वह क्षेत्र दंत चिकित्सा है। छाल में पत्तियों की तुलना में सक्रिय तत्वों की उच्च सांद्रता होती है और विशेष रूप से एंटीसेप्टिक और विरोधी भड़काऊ कार्रवाई वाले अवयवों में अधिक होती है। मसूड़े की सूजन  का इलाज करते समय नीम की छाल अत्यधिक प्रभावी होती है।

नीम के पौधे के अन्य औषधीय उपयोग | Other Medicinal Uses of Neem Plant

​1. पीलिया में नीम का इस्‍तेमाल फायदेमंद होता है। पित्ताशय से आंत में पहुंचने वाले पित्त में रुकावट आने से पीलिया होता है। ऐसे में रोगी को नीम के पत्तों के रस में सोंठ का चूर्ण मिलाकर देना चाहिए। या फिर सिर्फ दो भाग नीम की पत्तियों का रस या छाल का क्‍वाथ और एक भाग शहद मिला कर पीने से पीलिया रोग में काफी फायदा होता है।
​2. पथरी की समस्‍या से बचने के लिए लगभग 150 ग्राम नीम की पत्तियों को 1 लीटर पानी में पीसकर उबाल लें। इस पानी को सामान्‍य होने पर पी लें। नियमित रूप से ऐसा करने से पथरी निकल सकती है। पथरी यदि किडनी में है तो प्रतिदिन नीम के पत्तों की लगभग 2 ग्राम राख पानी के साथ लें।
​3. नीम डायबिटीज की रामबाण दवा है। व्यायाम की कमी तथा आहार में प्रोटीन की कमी से डायबिटीज होता है। सुबह के वक्‍त नीम का सत्व या जूस लेने से डायबिटीज नियंत्रण में रहती है।
साथ ही नीम के तने की छाल तथा मेथी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से डा‍यबिटीज में लाभ मिलता है। इसके अलावा नीम के पत्तों का जूस और एलोवेरा जूस के साथ मिलाकर रोजाना खाली पेट लेने से शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है।
इसके अलावा नीम एक रक्त-शोधक औषधि है, यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। 200 ग्राम तक नीम पत्तियों के प्रयोग से कोलेस्‍टॉल की मात्रा काफी कम हो जाती है। नीम का महीने में 10 दिन तक सेवन करते रहने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।
​4. नीम की पत्तियों का रस पीने से खून साफ होता है जिससे चेहरे की कांति बढ़ती है। नीम के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। इससे त्वचा रोगरहित होती है।
इसके अलावा स्‍नान करते समय नीम की ताजी पत्तियों को पानी में डालकर इस पानी से स्‍नान करें। साथ ही नीम एक बेहतरीन हेयर कंडीशनर भी है, नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर और पीस कर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में शहद मिलाकर इसे बालों में लगाने से रूसी की समस्‍या खत्‍म होती है और बाल बहुत ही मुलायम और चमकीले भी हो जाते हैं।

दोस्तों ये थे नीम के पेड़, पत्तों, टहनियों, छाल से होने वाले उपाय और उनसे होने बाले फायदे। आशा करते है दी गई जानकारी आपके लिए फायदेमंद होगी, और आपके शरीर को जिन भी बीमारियों ने घेर रखा है वो जल्दी से आपको छोड़ कर चली जाएगी। Krdigitalmakers की टीम आपकी अच्छी सेहत और उज्वल भविष्य की कामना करते है.

धन्यबाद!

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