Gulzar Shayari In Hindi

कैसे करें हम ख़ुद को तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं, तुम शर्ते बदल देते हो

याद आ जाएंगे आपको जिंदगी के हादसे आईने के रूबरू आप मुस्कान कर देखना

कभी कभी की मुलाकात अच्छी है
कदर खो देता है हर रोज का मिलना

अब भी बहुत है मुझमे, और खूबियां भी
ढूंढ़ने वाले तू सोच, तुझे चाहिये क्या मुझमे,

महफ़िल में गले मिलकर वह धीरे से कह गए,
यह दुनिया की रस्म है, इसे मुहोब्बत मत समझ लेना

ऐ इश्क़.. दिल की बात कहूँ तो बुरा तो नहीं मानोगे,
बड़ी राहत के दिन थे तेरी पहचान से पहले !

न जाने कौन सी शिकायतों का हम शिकार हो गया
जितना दिल साफ़ रखा उतने गुनहगार हो गए

वो अल्फाज़ ही क्या जो समझने पड़े
मैंने मोहब्बत की थी बकालत नही

फिर कुछ ऐसे भी मुझे आज़माया गया
पंख काटे गए, आसमान में उड़ाया गया

करवट तमाम रात भर बदलता में रह गया,
बिस्तर में उसकी यादों के काटें थे बेशुमार

शुक्रिया ए जिंदगी मुझे मजबूर बनाने के लिए,
शून्य तक गिरकर फिर मशहूर बनाने एक लिए

लाज़मी है मेरा भी गुरुर करना
मुझे उसने चाह था, जिसके चाहने वाले हज़ार थे

कितने खूबसूरत हुआ करते थे बचपन के वह दिन…
दो उंगलियां जुड़ते ही दोस्ती हो जाती थी

शिकायत और दुआ में जब एक ही शख्श हो,
समझ लो इश्क़ करने की अदा आ गई तुम्हे

क़सूर तो बहुत किये हैं ज़िन्दगी में पर
सजा वहां मिली यहाँ बेक़सूर थे

यूँ तो रौनकें गुलज़ार थी महफ़िल, उस रोज़ हसीं चहरों से…
जाने कैसे उस पर्दानशी की मासूमियत पर हमारी धड़कने आ गई!!

कुछ तो चाहत रही होगी इन बारिश की बूंदों की भी
वरना कोन गिरता है इस ज़मीन पर आसमान तक पहुंचने के बाद

दोस्त हालात बदलने वाले रखो
हालात के साथ बदलने वाले नहीं

आज दिल की Xerox निकाली सिर्फ बचपन की तस्वीर ही रंगीन नज़र आयी

कतरा कतरा यह वक्त पिघलता चला गया
लगी चोट पर चोट मगर में संबलता चल गया

उदासी अगरबत्ती की तरह होती है और देर तक रहती है
ख़ुशी फूलजड़ी की तरह होती है और कुश ही देर में जल जाती है

रास्ता ने चाहा तो फिर मिलेंगे हम,
मंज़िलों का तो कोई इरादा नहीं दिखता

तुम्हारी दुनिया में हमारी कोई कीमत हो या न हो
मगर हमारी दुनिया में तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता

कोन कहता है की दूरियां किलोमीटर में नापी जाती है
खुद से मिलने में भी उम्र गुज़र जाती है

मिलो एक बार को तुम शिद्दत से एक बात करनी है
तुज से गले लग कर तेरी ही शिकायते हज़ार करनी है

इतनी मोहब्बत मिली सारी बाँट दी दुनिया वालो को
जब मैंने झोली फैलाई तो किसी ने दर्द के सिवा खुश भी न दिया

ढूंढेंगे तो कमिया मिल ही जाएंगी
खुदा के बन्दे हैं, खुदा थोड़ी न हैं

जो न देते थे जवाब उनके सलाम आने लगे साहब
वक़्त बदला तो मेरे नीम पे आम आने लगे

तुम शोर करते रहो सुर्ख़ियों में आने के लिए
हमारी तो ख़ामोशी अखबार बनी हुई है

हमेशा से तो न रहा होगा तू सख्त दिल
किसी ने तेरी मासूमियत से भी खेला होगा

कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को
याद वही आते है, जो उड़ जाते हैं

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