अमृता अर्थात गिलोय क्या है गिलोय के सेवन विधि, फ़ायदे, नुकसान

अमृता अर्थात गिलोय क्या है? गिलोय के सेवन विधि, फ़ायदे, नुकसान

अमृता अर्थात गिलोय”

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका करदिगीतालमकेर्स पर एक और नई ब्लॉग पोस्ट में आज हम बात करेंगे गलोय यानि अमृता के बारे में, क्या इसके फायदे है और क्या नुकसान। क्या उपयोग है.
गिलोय को धरती की संजीवनी बूटी भी कहा जाता है। गिलोयय एक प्रकार की चमत्कारी बेल है जो जंगली झाड़ियों में पाई जाती है। प्राचीन काल से गिलोय को औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह सबसे उत्तम औषधियों में से एक है। इसका सेवन शरीर को स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। यह एक दिव्य औषधि है इसे संस्कृत में “अमृता” भी कहा जाता है अर्थात “अमृत के समान”।
प्राचीन पुस्तकों में उल्लेख मिलता है कि जब पुराने समय में समुद्र मंथन हुआ था उस समय ऐसा कहा जाता है कि राक्षस और देवताओं ने समुद्र मंथन किया था। परंतु जो अमृत का कलश था वह देवों के हाथ लग गया था। परंतु राक्षसों ने उसे चालाकी से चुरा लिया और वहां से भाग गए। भागते भागते जहां यह अमृता गिरी वहां पर यह औषधि पैदा हो गई जिसे गिलोय कहा जाता है।
​इसे कहीं पर भी आसानी से उगाया जा सकता है। आमतौर पर यह पेड़ों की छालों पर बेल के रूप में पाई जाती है। जिस पेड़ पर यह मिलती है यह उसके सारे गुण अवशोषित कर लेती है।
​सर्दियों में इस बेल की पत्तियां झड़ जाती है।इसकी पत्तियों का आकार पान के पत्ते की तरह होता है और इसका रंग हरा गाढ़ा होता है। ​नीम नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को औषधि के लिहाज में सर्वोत्तम माना जाता है इसलिए इसे नीम गिलोय के नाम से भी जाना जाता है। गिलोय जिस पेड़ पर चढ़ती है उसके सारे गुण अवशोषित कर लेती है इसी प्रकार वह नीम के पेड़ के गुण भी अवशोषित कर लेती है इसलिए इसे सर्वोत्तम माना गया है।
​इसमें इसमें पाए जाने वाले तत्वों की बात करें तो इसमें गलोय नामक ग्लूकोसाइड पाया जाता है। ​इसके इसके अलावा गिलोय में कॉपर फास्फोरस, जिंक, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं।
​गिलोय के फूल ग्रीष्म ऋतु में छोटे-छोटे पीले रंग के गुच्छों में आते हैं। फल भी गुटों में लगते हैं तथा मोटे मटर के आकार के होते हैं। पक जाने  पर यह खून की तरह लाल हो जाते हैं।

​औषधीय गुण | Medicinal Properties of Giloy

​आयुर्वेद के अनुसार पत्तियां जड़े और तना तीनों भाग लाभदायक होते हैं। लेकिन कई बीमारियों में इसका तना सबसे ज्यादा उपयोगी माना गया है। ​इसमें अधिक मात्रा में एंटीऑक्साइड पाए जाते हैं और साथ ही इसमें कैंसर रोधी गुण भी पाए जाते हैं। गिलोय मनुष्य के शरीर में बीमारियों की रोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
​गिलोय एक चमत्कारी औषधि है । यह डायबिटीज कब्जा तथा पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों में असरदार होती है।
​आयुर्वेद के अनुसार गिलोय सांस संबंधित समस्याओं जैसे खांसी अस्थमा इत्यादि बीमारियों की रोकथाम के लिए भी काफी लात लाभदायक होता है।
​डेंगू से बचने के लिए घरेलू उपाय के रूप में गिलोय का सेवन करना सबसे ज्यादा प्रचलित है।
​गिलोय में मौजूद एंटीपायरेटिक गुण बुखार इत्यादि को जल्दी ठीक करते हैं।
गिलोय हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। प्रतिदिन की गिलोय के जूस का सेवन रोज प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
​इसके इसके अलावा गिलोय एनीमिया, त्वचा संबंधित रोग गठिया, लीवर संबंधित रोग आदि को ठीक करने में लाभदायक है। गिलोय के सेवन से वात पित्त कफ तीनों नियंत्रित रहते हैं।
​इसके नियमित सेवन से पाचन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलने में मदद मिलती है। कब्ज जैसी पेट की बीमारी में राहत मिलती है। कब्ज होने पर एक-चौथाई कप गिलोय के रस में गुड़ मिलाकर पिएं।
​गिलोय एस्ट्रोजन का काम करती है और मानसिक तनाव या एंग्जाइटी के स्तर को कम करती है। इसके नियमित सेवन से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली दुरुस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।
​एंटी एजिंग गुणों के कारण गिलोय के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है, दाग-धब्बे दूर होते हैं। गिलोय की पत्तियों को पीस कर बने पेस्ट में अरंडी या नीम का थोड़ा-सा तेल गर्म करके मिलाएं। गिलोय का तेल थोड़े-से दूध में मिलाकर हल्का गर्म करें। इसे फटी त्वचा पर लगाने से त्वचा कोमल और साफ हो जाती है। इस पेस्ट को त्वचा पर लगाएं। बालों में रुसी, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की समस्याएं दूर होती हैं।
​गिलोय आँखों से देखने की क्षमता को भी ठीक रखने में सहायता करता है. इसके लिए गिलोय के पाउडर को पानी में उबाल कर उसको ठंडा करके फिर इस पानी से पलकों को धोना होता है इस प्रक्रिया से आँखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है.
​गिलोय त्वचा के लिए बहुत ही लाभदायक है, इसके बीज को अगर पीस करके इसका लेप चेहरे पर लगाये तो इसको लगाने से कील मुहासों की समस्या नहीं होगी. गिलोय में एंटी एजिंग के गुण समाहित होते है जोकि बढ़ते हुए उम्र के असर को जैसे कि त्वचा पर झुरियों का पड़ जाना, डार्क स्पॉट्स, उम्र के साथ त्वचा पर रेखाए पड़ जाती है, उसको रोकने में मददगार होता है. यह इस तरह के परेशानियों को कम करके त्वचा को सुंदर चमकीला और दाग धब्बो रहित बनाता है

​​गिलोय के दुष्प्रभाव | Side Effects of Giloy

​अगर गिलोय का सेवन आवश्यकता से अधिक किया जाए तो इसके कुछ नुकसान भी देखने को मिल सकते हैं।
​1. ऑटो इम्यून बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को उसका सेवन नहीं करना चाहिए।गिलोय के इस्तेमाल से किसी भी तरह का कोई भी गंभीर दुस्प्रभाव नहीं है. गिलोय का इस्तेमाल चुकि हर्बल युक्त और प्राकृतिक तथा सुरक्षित है. लेकिन फिर भी अगर किसी भी चीज की मात्रा को जरुरत से ज्यादा लेने पर उसका असर बहुत अच्छा नहीं होता है.
2. गिलोय खून में मौजूद शर्करा के निचले स्तर को कम कर देता है इसलिए जो व्यक्ति मधुमेह अर्थात शुगर की बीमारी से ग्रसित है, उन्हें इसका कम इस्तेमाल करना चाहिए और ज्यादा लम्बे समय तक इसका उपयोग नहीं करना चाहिए. इसके अलावा जो महिला गर्भवती है, उन्हें भी इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए. साथ ही जो महिला अगर बच्चे को स्तनपान करा रही है उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
3. गिलोय उन बच्चो के लिए सुरक्षित है, जो बच्चे पांच साल या उससे ज्यादा उम्र के है, लेकिन बड़े बच्चों को भी एक बार ही इसकी खुराक देनी चाहिए वो भी सिर्फ़ एक सप्ताह तक इससे ज्यादा नहीं देनी चाहिए. इसके ज्यादा सेवन से पेट में जलन की समस्या हो सकती है इसको या इससे बने उत्पाद दवा या कैप्सूल जो भी आप सेवन कर रहे हो, या कभी भी इसका इस्तेमाल अगर आप गोली के रूप में कर रहे है तो डॉ. की देख रेख में ही करे।

अमृता अर्थात गिलोय से जुड़े कुछ जरुरी सवाल

प्रO 1 – अमृता पीने से क्या होता है?

उO – जोड़ों के रोग में भी फायदेमंद है। कामला यानी जॉन्डिस रोग में इसकी पत्तियों का पाउडर शहद के साथ लेने से या इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर पीने से फायदा होता है। हेपटाइटिस बी में इसके सेवन से लाभ मिलता है। रक्तवर्द्धक होने के कारण यह खून की कमी यानी एनीमिया में बहुत लाभ पहुंचाती है।

प्रO 2 – गिलोय कौन कौन बीमारी में काम आती है?

उOगिलोय में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं साथ ही इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और कैंसर रोधी गुण होते हैं। इन्हीं गुणों की वजह से यह बुखार, पीलिया, गठिया, डायबिटीज, कब्ज़, एसिडिटी, अपच, मूत्र संबंधी रोगों आदि से आराम दिलाती है।

प्रO 3 – गिलोय कितने दिन पीना चाहिए?

उO – आपको रोज़ाना इसका आधा ग्लास दिन में एक बार पीना है।

प्रO 4 – गिलोय सेक्स पावर बढ़ता है क्या?

उO – इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाता है। यह शरीर को बैक्टिरिया जनित रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग सेक्स संबंधी रोगों के इलाज में भी किया जाता है।

प्रO 5 – नीम गिलोय तुलसी के फायदे?

उOगिलोय को इम्यूनिटी बढ़ाने, पैरों में जलन होने पर, पीलिया होने पर, एनीमिया जैसी समस्या में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं तुलसी से खांसी, जुकाम, कब्ज बुखार, पेट की समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है और नीम में बहुत औषधियां गुण पाए जाते हैं। हाल ही में कोरोना वायरस की वजह से इन तीनों का उपयोग बढ़ गया है।

 

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